परापूर्वकालसे नेपालके समथर भूभाग तराई अर्थात् थरुहट भूमिमे बसोवास करैत एयाल धर्ती पुत्र थारू समुदायके ऐतिहासिक पहिचान और गौरवके लेल आइके परिवर्तित संसारके सूचना सञ्चारके साथे वैज्ञानिक और नयाँ आधुनिक २१औं शताब्दीके युगमे बदलल सामाजिक परिवेशमे थारु समुदायके सामाजिक रहन, सहन, रीतिरिवाज, सामाजिक परम्परा अनुसारके वियाह, मुंडन, छठियार, श्राद्ध कर्म, सभा, सम्मेलन, वैचारिक गोष्ठी, सेमिनार, तालिम, छलफल और थारू जातिके कला संस्कृतिके धरोहरके रुपमे रहल लोकनाच, लोकगीत, लोकसंगीत तथा आधुनिक कलासंगीतके संरक्षण एवम् संवर्द्धनके वास्ते एकटा सार्वजनिक एवं समुदायके पहिचान और आत्मीयतासे जुरल रहल ठामके आवश्यकताके परिपूर्तिके वास्ते सिरहाके ऐतिहासिक नगरी लहान न.पा. १ स्थित सिंगराही गाममे दाता महानुभावसबद्वारा प्राप्त संस्थाके अपने निजि नाममे रहल जग्गामे थारू समुदायके पहिचान उजागर करावैवला 'थारु सामुदायिक सेवा सदन ' बनावैके लेल थारु सम्बद्ध शिक्षक, प्राध्यापक, कर्मचारी, व्यापारी, बुद्धिजीवी, समाजसेवी, राजनीतिक व्यक्तित्व, सरकारी तथा गैरसकारी क्षेत्रमे आवद्ध तमाम थारू समुदायके युवा, महिला लगायत थारू कूल और बंशजके साथ सहयोग और सक्रियतामे नेपाल सरकारके प्रचलित कानुन या सामाजिक संस्था ऐन २०३४ अनुसार गैरसरकारी, गैर नाफा मुलक एकटा सामाजिक संस्था “थारु सामुदायिक सेवा केन्द्र, लहान" नामक संस्था गठन क्याल ग्याल छै । जेकर कार्यालय सिरहाके लहानमे रहल छै ।